निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।


इस पंक्ति का भाव यह है कि भले ही दोहे में कम अक्षर होते हैं, लेकिन उसमें अर्थ बहुत गहरा छिपा होता है। यह ठीक वैसा ही होता है जैसे नट अपनी कुंडली में सिमट कर तरह-तरह के करतब कर अपने बड़े शरीर को सिमटाकर रस्सी पर चढ़ जाता है।


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