जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।


जैसा कि कविता में संदेश दिया गया है कि हमें बिना किसी की परवाह किए मौज-मस्ती के साथ जीवन बिताना चाहिए, लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रहे कि हमारी मस्ती से किसी का कोई नुकसान न हो। हमारी मस्ती का एक दायरा होना चाहिए जिससे किसी दूसरे इंसान की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। कई बार अंजाने में हमारी मस्ती दूसरों पर भारी पड़ जाती है। हम ऐसी चीजें कर बैठते हैं जिससे हमारा तो मनोरंजन हो जाता है, लेकिन उसस दूसरों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।


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