निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएं भी मानो जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे-

(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।


(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।


पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूंढि़ए।



(1) इनका उछलना और कूदना, खिलखिलाकर हँसते जाना, इनकी भाव-भंगी यह उल्लास कहाँ गायब हो जाता है|

(2) दयालु हिमालय के पिघलते हुए दिल की एक एक बूंद न जाने कबसे इकट्ठा हो होकर इन दो महानदों में प्रवाहित हो रही हैं।


(3) बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियां बनकर ये कैसे खेला करती हैं।


(4) हिमालय को ससुर और समुद्र को उसका दामाद कहने में भी कुछ झिझक नहीं होती है।


(5) पिता का विराट प्रेम पाकर भी अगर इनका मन अतृप्त ही है तो कौन होगा जो इनकी प्यास मिटा सकेगा|


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