कुछ यह भी करो

यह पाठ एक लोककथा पर आधारित है। अगर तुमने भी कभी कोई लोककथा सुनी है तो लोककथा और सामान्य कहानी के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा करो।



लोककथाओं और सामान्य कहानी में बहुत अंतर होता है। लोककथाएं किसी समुदाय विशेष पर आधारित होती हैं। मैंने ऐसे कई लोककथाएं सुनी है। जैसे कि इस लोककथा में गारो जनजाति के बारे में बताया गया है। ऐसे कई सारी जनजातियाँ होती हैं। जैसे-गुजरात की भील, बंजारा, पटेली। हिमाचल प्रदेश की गड्डी, कनौरा। जम्मू-कश्मीर की बक्करवाल, गुज्जर, आदि। इन सभी जनजातियों का रहन-सहन, खान-पान एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। सामान्य जातियों की बात करें तो हमारा रहन-सहन इनसे बिल्कुल भी मैच नहीं करता। चाहे बोली-भाषा हो या फिर कपड़ों को पहनने का स्टाइल सब कुछ बहुत अलग होता है। यह लोग अपनी जनजाति में ही व्यस्त रहते और ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखते वहीं सामान्य जातियों में ऐसा नही होता।


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