निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए-
क) कमरतोड़ महँगाई
1. महँगाई के कारण
2. समाज पर प्रभाव
3. व्यावहारिक समाधान
ख) स्वच्छ भारत अभियान
1. विकास में स्वच्छता का योगदान
2. अस्वच्छता से हानियाँ
3. रोकने के उपाय
ग) बदलती जीवन शैली
1. जीवन शैली का आशय
2. बदलाव कैसा
3. परिणाम
क) कमरतोड़ महँगाई
1. महँगाई के कारण- हमारे देश में महंगाई एक आर्थिक संकट है। महंगाई तब बढ़ जाती है जब किसी वस्तु के दाम अचानक बढ़ जाए। समय के साथ या यूं कहे कि महंगाई और भ्रष्टाचार की वजह से अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और गरीब होता जा रहा है। ऐसे में अगर यह कहें कि महंगाई ने कमरतोड़ दी है तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगा।
2. समाज पर प्रभाव- महंगाई बढ़ने से समाज पर बुरा असर पड़ा है। आज के समय में गरीब की आय तो बढ़ी नहीं है लेकिन बस्तुओं के दाम आवश्य बढ़ गए हैं| आज हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। किसी भी चीज को खरीदने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर इन दिनों पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। पेट्रोल एक ऐसी चीज है जिसे गाड़ी में भराना हर शख्स की मजबूरी है। लगातार बढ़ते पेट्रोल के दाम ने आम इंसान की जेब पर बुरा प्रभाव डाला है। यही हाल खाने पीने की चीजों और कपड़ों का भी है। इनके दाम भी लगातार बढ़ते रहते हैं|
3. व्यावहारिक समाधान- महंगाई की मार से बचने के लिए निम्नलिखित समाधान किए जा सकते हैं।
1. उपभोक्ता और सरकार के बीच अच्छे गठबंधन से महंगाई पर रोक लगाई जा सकती है।
2. समय-समय पर सरकार को जांच करते रहना चाहिए कि कोई व्यापारी कालाबाजारी या फिर मुनाफाखोरी तो नहीं कर रहा।
3. ग्राहक को अपने सामान लेते वक्त सचेत रहना होगा साथ ही प्रत्येक ग्राहक को अपने अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए।
4. अगर कोई दुकानदार ज्यादा दाम पर सामान बेच रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
5. अनाज खाने-पीने की सामान्य बस्तुओं के दामों पर सरकार को नजर बनाए रखनी होगी।
ख) स्वच्छ भारत अभियान
विकास में स्वच्छता का योगदान – वर्तमान भारत सरकार द्वारा भारत में “स्वच्छ भारत अभियान” नाम से देश में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है| हर गली, हर सड़क, हर पार्क यहां तक कि देश का एक-एक कोना साफ रहे यही अभियान पूरे देशभर में जोर-शोर से चल रहा है। अगर देश स्वच्छ और बीमारी रहित होगा तो इससे देश के विकास में भी योगदान मिलेगा। स्वच्छता मिशन को देश में बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है जिसमें आम और खास दोनों लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
अस्वच्छता से हानियाँ- अस्वच्छता से कई तरह की हानियां होती है। अस्वच्छता के कारण होने वाली हानियाँ एवं इनके प्रभाव-
1. गंदगी कई बीमारियों को जन्म देती है।
2. इससे ना केवल आप बल्कि आपके आसपास के लोग भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
3. बीमारियों की वजह से स्वास्थ्य खराब हो जाता है और इलाज में बहुत सारा धन खर्च करना पड़ता है|
4. बड़ों की तुलना में बच्चे जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
रोकने के उपाय- अस्वच्छता रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं-
1. सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग रखें।
2. कहीं पर भी खाकर कूड़ा ना फेंके।
3. खाने के बाद कूड़े को कूड़ेदान में ही फेंके।
4. आसपास अगर गंदगी फैली तो नगर निगम को इस बात की जानकारी दें।
5. नालियों या फिर गड्ढ़ों में पानी ना भरने दें। इससे बीमारियां फैल सकती हैं।
6. किसी भी चीज को खाने से पहले अपने हाथ जरूर साफ करें।
7. कूड़े को ढ़ककर रखें।
8. कूलर में भरे पानी को बदलते रहे। ताकि मच्छर ना पनपने पाएं।
संक्षेप में कहें तो स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ और स्वस्थ्य जीवन का आधार है|
(ग) बदलती जीवन शैली
1. जीवन शैली का आशय- जिंदगी जीने के तरीके को ही जीवन शैली कहा जाता है। देश में हर तरह के व्यक्ति रहते हैं। फिर चाहे अमीर हो या फिर गरीब। इन दोनों के बीच की एक जीवन शैली आती है उसे मिडिल क्लास कहते है। मिडिल क्लास में आने वाला व्यक्ति ना तो अमीर होता है और ना ही गरीब। खास बात यह है कि इन तीनों की क्लास के लोगों की जीवन शैली एक दूसरे से एकदम अलग होती है। हालांकि समय के साथ सभी की जीवन शैली में बदलाव होता रहता है|
2. बदलाव कैसा- हर किसी का अपनी जिंदगी जीने का तरीका अलग होता है। अमीर के पास अथाह पैसा होता है तो वह किसी भी चीज को पलक झपकते ही खरीद लेता है। जबिक मिडिल क्लास वाला व्यक्ति अपने क्लास को बचाने के चक्कर में हमेशा सफर करता है। उसे एक तरफ तो अपनी इज्जत की परवाह होती है तो दूसरी तरफ अपनी इच्छाओं को भी पूरा करना होता है। जबकि गरीब व्यक्ति के पास पैसे की कमी होती है। इस वजह से वह जिन परिस्थितियों में जी रहा होता है उसी में उसे सुकून मिलता है। यह तीनों ही क्लास एक दूसरे से काफी अलग है और यही इनका बदलाव भी है।
3. परिणाम- जीवन शैली किसकी कैसी है उसके परिणाम भी उसी तरह के होते हैं। आपने यह कहावत तो जरूर सुनी होगी, ‘जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारने चाहिए’। यानी कि जितना पैसा हो उसी में सुकून करना चाहिए।