निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए-
(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही।
(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
(ग) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।
बार बार मोहि लागि बोलावा।।
(घ) लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।
बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।
(क) ‘बालक बोलि बधौं नहिं तोही’ में ‘ब’ वर्ग की आवृत्ति होने पर अनुप्रसास अलंकार है।
(ख) ‘‘कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।’’ उपमेय ‘बचन’ की उपमान ‘कुलिस’ से समानता दिखाने पर यहाँ उपमा अलंकार है। ‘कोटि कुलिस’ में ‘क’ वर्ग की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार भी है।
(ग) ‘‘तुम्ह तो कालु हाँक जनु लावा’’
यहाँ उत्प्रेक्षा वाचक शब्द ‘जनु’ से उत्प्रेक्षा-अलंकार है।
‘‘बार-बार मोहि लागि बोलावा’’ में बार-बार शब्द की आवृत्ति होने पर पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(घ) ‘लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु’ में उपमावाचक शब्द ‘सरिस’ के प्रयोग से उपमा अलंकार