चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?


कवि ने पूर्णिमा की चाँदनी रात में धरती और आकाश की सुंदरता को निम्नलिखित रूपों में देखा है-

(क) स्फटिक शिलाओं से निकलने वाली दूधिया रोशनी में


(ख) चारों ओर फैलती चाँदनी को दही रुपी समुद्र की तरह देखा है जो चारों ओर से हिलोरे ले रहा है।


(ग) आँगन में उमड़ते हुए दूध के झाग के रूप में देखा है। धरती पर फैली चांदनी की रंगत आँगन की फर्श पर फैले दूध के झाग की तरह सफ़ेद है।


(घ) चाँदनी को नायिका के रूप में देखा है जो तारों से सुसज्जित है।


(च) अंबर-रूपी दर्पण के रूप में चाँदनी को देखा है। जिसमे राधारानी का मुख प्रतिबिंबित हो रहा है।


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