निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) ‘जगतु तपोवन सौ किए’ दोहे के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं?
(ख) सुमित्रानंदन पंत जी कल्पना के सुकुमार कवि है- स्पष्ट कीजिए।
(ग) कवि सहायक न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?
कवि ने विपरीत परिस्थितियों में जीवों द्वारा आपसी वैर भुलाकर मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया है, यह दोहा बिहारी की प्रसिद्ध रचना ‘सतसई’ से लिया गया है। इसमें कवि ने ग्रीष्म ऋतु की भयंकर गर्मी का वर्णन किया है। इस दोहे के अनुसार ग्रीष्म ऋतु की गर्मी ने जंगल को तपोवन जैसा पवित्र बना दिया है। हिंसा की जगह सभी में आपसी प्रेम, सौहार्द और मित्रता का भाव उत्पन्न हो गया है। शेर, हिरण, मोर, सांप आदि जीव शत्रुता भूलकर एक साथ गर्मी को सहन कर रहे हैं क्योंकि आपसी सहयोग से ही वे इस कठिन दौर को पार कर सकते हैं|
(ख)
कविता में कवि ने प्रकृति का सुन्दर मानवीय चित्रण किया है, उन्होंने प्रकृति के दृश्यों को मानवीय क्रियाओ से जोड़ा है जैसे- पहाड़ द्वारा तालाब के दर्पण में अपनी सूरत निहारना जैसे की मानव निहारता है, झरनों का मोती स्वरूप चमकना, पेड़ों का भय से धंसना, बादलों व बिजली का रथ पर सवार होना इत्यादि। उनकी रचनाएँ प्रकृति और सौंदर्य की संवेदनशील अभिव्यक्तियों से परिपूर्ण है। इसलिए सुमित्रानंदन पन्त को कल्पना के सुकुमार कवि कहा जाता है।
(ग)
कवि कहता है कि दुख के समय में यदि कोई सहायक नहीं मिलता तो भी उसे उसका दुख नहीं है। कवि ईश्वर से केवल इतनी प्रार्थना करता है कि ऐसे समय में भी वह अपना आत्मविश्वास और साहस को न खोए। वह चाहता है कि ईश्वर उसे इतनी शक्ति दे कि दुख में भी
उसका मन न घबराए और न ही हार माने। वह उन ‘दुखों से लड़ने की शक्ति पाने की प्रार्थना’
ईश्वर करता है।