‘हमारे जीवन में डाकिये की भूमिका’ क्या है? इस विषय पर दस वाक्य लिखिए।
इंटरनेट के इस दौर में डाकिये की भूमिका खत्म सी हो गई है। अब अपना संदेश दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने में पल भर भी नहीं लगता। आज हम एस.एम्.एस, इन्टरनेट एवं ईमेल के माध्यम से अपना सन्देश बड़ी आसानी से चन्द पलों में दूसरे व्यक्ति तक पहुँचा सकते हैं| लेकिन 10 साल पहले तक ये डाकिये ही एक व्यक्ति का संदेश दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का काम करते थे। डाकिये 10 किमी दूर भी साइकिल चलाकर पहुंचते थे। उस साइकिल के कैरियर पर ढेरों पत्र बंधे होते थे। घर का पता देख वो उस पत्र को वहां मौजूद व्यक्ति को देते थे। इसके बाद अगला पत्र पहुंचाने के लिए आगे बढ़ जाते थे। ये डाकिये सरकारी नौकर होते थे। पत्र पहुंचाने के बदले इन्हें सैलरी मिलती है और उसी से इनके घर का गुजारा होता है। इन डाकियों द्वारा पहुंचाए गए पत्रों से कभी मनुष्य को खुशी मिलती है तो कभी गम भी मिलता है। संदेश अच्छा हो या बुरा, पहुंचाना डाकियों का काम होता है और ये काम वे इमानदारी से करते हैं। दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में मनी-ऑर्डर के लिए डाकिये की राह देखी जाती है। उस वक्त तो ये डाकिये ‘देवदूत’ बन जाते हैं और दूसरे के घरों का चूल्हा जलाते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि डाकिये की हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
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