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आपके विचार में आपा और आत्मविश्वास में तथा आपा और उत्साह में क्या कोई अंतर हो सकता है? स्पष्ट करें।

आपा और आत्मविश्वास:

आपा का अर्थ है- अहंकार जबकि आत्मविश्वास का अर्थ है- किसी काम को करने के लेकर खुद पर विश्वास।


आपा और उत्साह:


आपा का अर्थ है- घमंड और उत्साह का अर्थ है- किसी काम को करने का मन में जोश।


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4

मनुष्य के व्यवहार में ही दूसरों को विरोधी बना लेनेवाले दोष होते हैं। यह भावार्थ किस दोहे से व्यक्त होता है?

1

क्या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।

ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।


इन दोनों पंक्तियों में आपा को छोड़ देने या खो देने की बात की गई है। आपा किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? क्या आपा स्वार्थ के निकट का अर्थ देता है या घमंड का?


3

सभी मनुष्य एक ही प्रकार से देखते-सुनते हैं पर एकसमान विचार नहीं रखते। सभी अपनी-अपनी मनोवृत्तियों के अनुसार कार्य करते हैं। पाठ में आई कबीर की किस साखी से उपर्युक्त पंक्तियों के भाव मिलते हैं, एकसमान होने के लिए आवश्यक क्या है? लिखिए।

4

कबीर के दोहों को साखी क्यों कहा जाता है? ज्ञात कीजिए।