पाठ से
लेखक बैडमिंटन चैंपियन था। उसे हॉकी खेलने की प्रेरणा किससे और कैसे मिली?
लेखक एक बैडमिंटन चैंपियन था। एक दिन उसने अपने स्कूल के ग्राउंड में ध्यानचंद को हॉकी खेलते देखा जिससे उन्हें हॉकी खेलने की प्रेरणा मिली। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को मैदान पर हॉकी खेलते देख लेखक के मन में भी उत्सुकता जागी और उसने हॉकी खिलाड़ी बनने का फैसला कर लिया। इसके बाद लेखक हॉकी का ही होकर रह गया। यह बताता है कि बड़े खिलाड़ी को देखना आप पर कितना असर डालता है।
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