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छिप-छिपकर

ऐसी छोटी बच्ची का अकेले सफ़र करना ठीक नहीं।


क्या तुमने भी कभी कोई काम इसी तरह छिपकर किया है? उसके बारे में लिखो।


हां जब मैं कक्षा सात में पढ़ता था तो एक बार घरवालों को बिना बताए अकेले स्कूल से फिल्म देखने चला गया था। घर से थियेटर काफी दूर था। शाम को फिल्म देखने के बाद जब अंधेरा हुआ तो मैं दिशा भटक गया था। उस वक्त मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। मैंने लोगों से घर का रास्ता पूछने की काफी कोशिश की लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की। देर रात तक मैं सड़कों पर आंख में आंसू लिए घूमता रहा। उधर घरवालों को मेरी चिंता सताए जा रही थी। आखिर में एक व्यक्ति ने मेरी सहायता की और मुझे सही सलामत घर तक पहुंचा दिया। घर पहुंचते ही मैं मां से लिपटकर खूब रोया और उन्हें कभी बिना बताए घर से न जाने का भरोसा दिलाया।


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छिप-छिपकर

ऐसी छोटी बच्ची का अकेले सफ़र करना ठीक नहीं।


क्या तुम इस बात से सहमत हो? अपने उत्तर का कारण भी बताओ।


3

छिप-छिपकर

ऐसी छोटी बच्ची का अकेले सफ़र करना ठीक नहीं।


वल्ली ने यह यात्रा घऱ के बड़ों से छिपकर की थी। तुम्हारे विचार से उसने ठीक किया या गलत? क्यों?


4

मना करना

मैंने कह दिया न नहीं........ उसने दृढ़ता से कहा।


वल्ली ने कंडक्टर से खाने-पीने का समान लेने ने साफ़ मना कर दिया।


ऐसी और कौन-कौन सी बातें हो सकती हैं जिनके लिए तुम्हें भी बड़ों को दृढ़ता से मना कर देना चाहिए।


4

मना करना

मैंने कह दिया न नहीं........ उसने दृढ़ता से कहा।


वल्ली ने कंडक्टर से खाने-पीने का समान लेने ने साफ़ मना कर दिया।


क्या तुमने भी कभी किसी को किसी चीज़/कार्य के लिए मना किया है? उसके बारे में बताओ