‘यह कोई जरूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए’- क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बड़ों से बातचीत के आधार पर लिखिए।
नहीं, मेरे अनुसार शोहरत और पैसा एक सिक्के के दो पहलू जैसे हैं। ऐसो कोई व्यक्ति नहीं है जो पैसा न चाहता हो। आजकल के जमाने में मिडिल क्लास हो या फिर हायर क्लास, वह यही चाहता है कि उसकी झोली हमेशा पैसों से भरी रहे। ऐशो आराम की जिंदगी हर कोई जीना चाहता है। हर महीने बाहर घूमना, अच्छे से अच्छे रेस्टोरेंट में खाना खाना, मेट्रो सिटी में अपना मकान होना और बड़ी सी गाड़ी का सपना हर किसा का होता है। इन सभी सपनों को पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। अगर आप किसी से यह पूछेंगे कि पैसा चाहिए या फिर शोहरत तो ज्यादातर लोग मेरी समझ से पैसों का ही चुनाव करेंगे।
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