कुछ यह भी करो
अपने प्रदेश या किसी अन्य राज्य की किसी जनजाति के बारे में पता करो।
उसके बारे में अपनी कक्षा में बताओ।
बंजारा समाज का कोई ठिकाना नहीं होता। यह लोग पूरी जंदगी इधर से उधर में ही निकाल देते हैं। किसी स्थान से इन लोगों का कोई लगाव नहीं होता। सदियों से यह लोग दूर-दराज इलाकों में निडर होकर यात्राएं करते हैं। इन लोगों की कुछ विशेषताएं होती हैं। जैसे- डांस, संगीत, गोदना और चित्रकारी शामिल है। ज्यादातर बंजारों के घर अस्थायी होते हैं। उनके कारवां में बैल होते हैं। उन्हीं बैलगाड़ी के ऊपर वह अपना घर बनाकर रहते हैं। यह लोग बैलगाड़ी पर सवार होकर दिनभर चलते रहते हैं और दिन ढलते ही कहीं डेरा डालकर खाना बनाते हैं। आपने कई बार सड़क किनारे टेंट में इन लोगों को रहते हुए देखा होगा। यह लोग इसी तरह कई हफ्तों या फिर महीनों तक इसी तरह रहकर वक्त गुजार देते हैं।
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