पाठ से
पोंगल चार दिनों तक मनाया जाता है। प्रत्येक दिन के मुख्य क्रिया-कलाप बताओ।
1. पोंगल का त्योहार चार दिन तक मानाया जाता है, जिसमें पहले दिन ‘भोगी’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है। शाम के वक्त बच्चे ढोल-नगाड़ों के साथ खुशियों में सराबोर रहते हैं।
2. दूसरा दिन ‘पोंगल’ का ही होता है। इस दिन महलिाएं सुबह-सुबह उठकर घर के बाहर रंगोली बनाती हैं। त्योहार की खुशी में लोग नए-नए कपड़े पहनते हैं। घर के आँगन में नए बर्तन में पहली फसल का चावल और गन्ने का रस मिलाकर पोंगल बनाया जाता है। इसे चूल्हे में न गिरने तक पकाया जाता है। इस प्रसाद को रिश्तेदारों तथा पड़ोसी के साथ मिलकर खाया जाता है।
3. तीसरा दिन ‘मट्टु पोंगल’ के नाम से जाना जाता है। तीसरे दिन लोग सुबह उठकर अपने गाय-बैलों को नहलाने के बाद सजाते हैं। गाय-बैलों की पूजा करने के बाद उन्हें खाने के लिए गुड़ व पौष्टिक चीजें दी जाती हैं।
4. त्योहार के चौथे दिन को ‘काणुम पोंगल’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन पूरा परिवार मेले में जाता है तथा पूरा दिन परिवार के साथ लोग मेलों का आनंद उठाते हैं।
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