भाव स्पष्ट कीजिए-
रूपांतरण है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
यहाँ कवि का अभिप्राय यह है कि फसल सूरज के प्रकाश की उपस्थिति में प्राकृतिक क्रियाएँ पूर्ण कर अपने लिए भोजन का निर्माण करती है और पुष्ट होती है| इसी कारण से कवि ने फसल को सूरज की किरणों का रूपांतरण कहा है|
इसके साथ ही फसल के उगने और स्वस्थ्य रहने में हवा का भी बराबर का योगदान होता है| फसल हवा की उपस्थिति में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करती है जो कि फसल के जीवित रहने एवं वृद्धि के लिए आवश्यक है|
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