निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
छाया भी कब छाया ढ़ूँढ़ने लगती है?
गरमी की ऋतु में सूरज बिलकुल सिर के ऊपर आ जाता है, तो विभिन्न वस्तुओं की छाया सिकुड़कर वस्तुओं के नीचे दुबक जाती है। जेठ महीने की गर्मी बहुत प्रचंड होती है और इसलिए सारे मानव और मानवेत्तर प्राणियों के लिए उसे सहन करपाना असंभव हो जाता है। वृक्षों की और घर की दीवारों की छाया उनके अंदर ही अंदर रहती हैं, वह बाहर नहीं जाती। तेज धूप से बचने के लिए छाया घने जंगलों को अपना घर बनाकर उसी में प्रवेश कर जाती है छाया कहीं दिखाई नहीं देती और इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि इस स्थिति में छाया भी छाया ढ़ूँढ़ने लगती है।
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