दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?
लोगों ने दुनिया की इस भाग-दौड़ में स्वयं को इतना व्यस्त कर लिया है कि उनके पास दूसरों के लिए समय ही नहीं है। लोग अक्सर छोटे-छोटे बच्चों को काम करते हुए देखते है लेकिन अपने व्यस्त जीवन में उलझे होने के कारण वे ये सब भूल जाते है। छोटे-छोटे बच्चों से काम कराकर कुछ लोग तो बहुत मुनाफा कमा रहे है इसलिए वे सब बाल मजदूरी को ख़त्म करने के बजाए इसे बढ़ावा देते है। लोग इतने स्वार्थी हो गए है कि वे अपनी परेशानियों को तो समझते है लेकिन दूसरों की परेशानियां और विवशता उनके लिए कोई महत्व नहीं रखती है फिर चाहे वो परेशानियां एक छोटे बच्चे की ही क्यों न हो।
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