‘फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है’- पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए?
यह सत्य है कि हमें बिना फल की इच्छा किये अपने कर्म करने चाहिए क्योंकि फल देने वाला भगवान् है और जैसे हम कर्म करेंगे वैसा भगवान् हमें फल देगा। इसलिए अच्छे कर्म करने चाहिए जिससे हमें अच्छा फल मिले। किसी भी कार्य को मुश्किल समझकर उसे छोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि हो सकता है कि आपके भरसक प्रयास के कारण वह काम सफल हो जाए। जैसे लेखक ने हार न मानते हुए अपने निरंतर प्रयत्न के कारण कुँए से चिट्ठियां निकाल ली और खुद भी कुँए से सही सलामत बाहर आ गया जबकि कुँए में सांप था और कुँए के अंदर सांप को मार पाना असंभव था। अतः मनुष्य को सिर्फ अपना कर्म करना चाहिए और फल की इच्छा छोड़ देनी चाहिए|
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