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निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिएः

क) दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी


और मुफ़लित-ओ गदा है सो है वो भी आदमी


ख) आशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर


ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर

) कवि ने कहा है कि दुनिया में जो कुछ करता है आदमी ही करता है। आदमी ही बादशाह बनता है, आदमी ही फकीर हो जाता है। स्वादिष्ट भोजन भी आदमी को नसीब होता है और सूखी रोटी भी वही खाता है। हर आदमी अलग है। आदमी की अलग अलग जिम्मेदारियां हैं। उसके व्यवहार और गुण अलग हैं। उसकी जीवन जीने की शैली और काम करने का तरीका भी एक दूसरे से भिन्न होता है।


) इस दुनिया में शाही से लेकर प्यादे तक, सभी तरह के आदमी हैं। आदमी ही है जो किसी के दिल के छू देने वाला काम करता है और वह आदमी है है जो किसी के दिल को चोट पहुंचाने से भी नहीं चूकता। कोई संत होता है तो कोई भक्त होता है। दुनिया में अच्छे और बुरे दोनों तरह के आदमी होते हैं|


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1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

इस कविता का कौन-सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?

1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

आदमी की प्रवृत्ति का उल्लेख कीजिए।

3

निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए-

क) पढ़ते हैं आदमी ही कुरआ और नमाज़ यां


और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ


जो उनका ताड़ता है सो है वो भी आदमी


ख) पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी


चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी


और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी

4

नीचे लिखे शब्दों के उच्चारण कीजिए और समझिए कि किस प्रकार नुक्ते के कारण उनमें अर्थ परिवर्तन आ गया है।

राज़ (रहस्य) फ़न (कौशल)


राज़ (शासन) फन (साँप का मुँह)


ज़रा (थोड़ा) फ़लक (आकाश)


जरा (बुढ़ापा) फलक (लकड़ी का तख्ता)


ज फ़ से युक्त दो-दो शब्दों को और लिखिए|