Q2 of 10 Page 109

निम्नलिखित पंक्तियों के आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए-

क) अविश्रांत बरसा करके भी


आँखे तिनक नहीं रीतीं


ख) बुझी पड़ी थी चिता वहाँ पर


छाती धधक उठी मेरी


ग) हाय! वही चुपचाप पड़ी थी


अटल शांति सी धारण कर


घ) पापी नें मंदिर में घुसकर


किया अनर्थ बड़ा भारी

क) कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में सुकिया के पिता की दुर्दशा को दर्शाया गया है। वे अपनी पुत्री से दूर होने के कारण लगातार रोते रहे लेकिन फिर भी उनकी आँखों के आंसू नहीं रुके| उनके मन की पीड़ा आंसू के रूप में निरंतर बह रही है|

ख) प्रस्तुत पंक्तियों में मन्दिर से खाली हाथ लौटने पर सुकिया के पिता की मनोदशा का वर्णन किया गया है। वे मन्दिर से वापस आने पर सुकिया को जीवित अवस्था में तो क्या उसकी लाश तक देख पाने में सफल नहीं होते हैं। अपने बेटी की बुझ चुकी चिता को देखकर उनकी छाती में एक हूक भरी हताशा जन्म ले लेती है जो उनके ह्दय को दाह से भर देती है।


ग) प्रस्तुत पंक्तियों में सुकिया को महामारी के चपेट में ले लेने पर उसकी अवस्था का वर्णन किया गया है। वह बीमारी में कमजोर होकर विस्तर पर इस प्रकार लेटी हुए थी मानो उसने अटल शांति धारण कर राखी हो|


घ) प्रस्तुत पंक्तियां मंदिर के पुजारी के मुख से कहवाई गयी हैं। वह अछूत सुकिया के पिता को उसके द्वारा प्रसाद दे देने पर काफी विफरित होकर ऐसी दुत्कार भरी बातें सुकिया के पिता के बारे में मंदिर में उपस्थित अन्य पुजारियों से कहता है। वह कहता है कि इस अछूत व्यक्ति ने पवित्र मंदिर में मंदिर में प्रवेश कर धर्म का अनादर किया है|


More from this chapter

All 10 →