कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा हैं?
कवि प्रकृति के सौंदर्य से प्रेम करने वाला है। वह जहां भी जाता है वहां के वातावरण का आनंद लेता है। प्रकृति से उसका जुड़ाव इतना गहरा है कि वह चाहकर भी उसे छोड़ना नहीं चाहता। जब वह वापस लौटता है तो उसकी आखों में आंसू होते हैं। वह वापस लौटना तो चाहता है पर उसका मन उस वापस लौट जाने की इजाजत नहीं देता। इसी वजह से कवि अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ कह रहा है।
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