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कवि ने अपने आने को उल्लास और जाने को आँसू बनकर बह जाना क्यों कहा हैं?

कवि प्रकृति के सौंदर्य से प्रेम करने वाला है। वह जहां भी जाता है वहां के वातावरण का आनंद लेता है। प्रकृति से उसका जुड़ाव इतना गहरा है कि वह चाहकर भी उसे छोड़ना नहीं चाहता। जब वह वापस लौटता है तो उसकी आखों में आंसू होते हैं। वह वापस लौटना तो चाहता है पर उसका मन उस वापस लौट जाने की इजाजत नहीं देता। इसी वजह से कवि अपने आने को उल्लास और जाने को आँसू बनकर बह जाना कह रहा है।


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भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटाने वाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

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कविता में ऐसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?

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जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।

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एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि ‘‘हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।’’ दूसरी पंक्ति में उसने यह कह कर अपने अस्तित्व को महत्व दिया है कि ‘‘मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।’’ यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं। उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं।