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जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।

जैसा कि कविता में संदेश दिया गया है कि हमें बिना किसी की परवाह किए मौज-मस्ती के साथ जीवन बिताना चाहिए, लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रहे कि हमारी मस्ती से किसी का कोई नुकसान न हो। हमारी मस्ती का एक दायरा होना चाहिए जिससे किसी दूसरे इंसान की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। कई बार अंजाने में हमारी मस्ती दूसरों पर भारी पड़ जाती है। हम ऐसी चीजें कर बैठते हैं जिससे हमारा तो मनोरंजन हो जाता है, लेकिन उसस दूसरों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।


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भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटाने वाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

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कविता में ऐसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?

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एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि ‘‘हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।’’ दूसरी पंक्ति में उसने यह कह कर अपने अस्तित्व को महत्व दिया है कि ‘‘मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।’’ यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं। उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं।

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संतुष्टि के लिए कवि ने छककर’,‘जी भरकर और खुलकर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। इसी भाव को व्यक्त करने वाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे हँसकर, गाकर।