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मातृभाषा की कविता

अपनी मातृभाषा में ‘किसान’ पर लिखी गई कविता को अपने मित्रों व शिक्षक को सुनाओ।


उगाकर अन्न मेहनत से, हमें भोजन दिलाता हैं,

नमन है उस यौवान को , जो हल से खेल जाता हैं।


पसीना ओस बनकर पत्तियों में जब लहलहराता हैं,


पत्तियां जब फुल बनकर खिलता हैं,


तभी चहरा खुशा से चमक उठता हैं।


मेहनत से सिचाई करता, अन्न देता


वही किसान कहलाता हैं।


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3

छिपा है कौन?

“हरा खेत लहराएगा


हरी पताका फहराएगा


छिपा हुआ बादल तब उसमें


रूप बदलकर मुसकाएगा”


कविता में हम पात हैं कि सावन की हरियाली बादलों के कारण ही हुई है इसलिए कवि को उस हरियाली में मुसकराते बादल ही दिखाई देते हैं। बताओ, कवि को इन सब में कौन दिखाई दे सकता है-


क) गर्म हवा। लू के थपेड़े।


ख) सागर में उठती ऊँची-ऊँची लहरें।


ग) सुगंध फैलाता हुआ फूल।


घ) चैन की नींद सोती हुई बालिका।


4

किस्म-किस्म की खेती

आजकल पुराने जमाने की अपेक्षा किसान बहुत अधिक चीज़ों की खेती करने लगे हैं। खेती का स्वरूप बहुत विशाल हो गया है। पता करो कि आजकल भारत के लोग किन-किन चीज़ों की खेती करते हैं? अपने साथियों के साथ मिलकर एक सूची तैयार करो।


6

खेल-खेल में

“छिपे खेत में, आँखमिचौनी सी करते आए हैं”


तुम जानते हो कि आँखमिचौनी एक खेल है जिसमें एक खिलाड़ी आँखें बंद कर लेता है और बाकी खिलाड़ी छिप जाते हैं।


तुम भी अपने आस-पास खेले जाने वाले एसे ही कुछ खेलों के नाम लिखो। यह भी बताओ कि इन खेलों को कैसे खेलते हैं?


7

गरजना-बरसना

“उड़ने वाले काले जलधर


नाच-नाच कर गरज-गरज कर


ओढ़ फुहारों की सत चादर


देख उतरते हैं धरती पर”


बादल गरज-गरज कर धरती पर बरसते हैं परंतु इसके बिलकुल उलट एक मुहावरा है-


जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं।


कक्षा में पाँच-पाँच बच्चों के समूह बनाकर चर्चा करो कि दोनों बातों में से कौन-सी बात अधिक सही है। अपने उत्तर का कारण भी बताओ। चर्चा के बाद प्रत्येक समूह का एक प्रतिनिधि पूरी कक्षा को अपने समूह के विचार बताएगा।