गरजना-बरसना
“उड़ने वाले काले जलधर
नाच-नाच कर गरज-गरज कर
ओढ़ फुहारों की सत चादर
देख उतरते हैं धरती पर”
बादल गरज-गरज कर धरती पर बरसते हैं परंतु इसके बिलकुल उलट एक मुहावरा है-
जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं।
कक्षा में पाँच-पाँच बच्चों के समूह बनाकर चर्चा करो कि दोनों बातों में से कौन-सी बात अधिक सही है। अपने उत्तर का कारण भी बताओ। चर्चा के बाद प्रत्येक समूह का एक प्रतिनिधि पूरी कक्षा को अपने समूह के विचार बताएगा।
कवि कहते हैं कि कभी कभी बादल बहुत खूब गरज गरज कर बरसते हैं। परंतु जब बदल के बरसने का वक्त होता हैं तभी वह बरसने से मुंह मोड लेता हैं। इस प्रकार जब उसकी जरूरत होती हैं तभी वह अपने नखरे दिखाने लगता हैं। पर जब बहुत नखरों के बाद जब वह गरजता हैं तो एक सुकून प्रप्त होता हैं , जैसे प्यासे को पानी मिल जाए। अतः दोनों बातों में वह सही पाता हैं।
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