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वर्षा ऋतू में जब आकाश में बादल घिर आतें हैं तब मोर पंख फैलाकर धीरे-धीरे मचलने लगता है- यह मोहक दृश्य देखने का प्रयास कीजिए।

आज स्कूल की तरफ से हम लोगों को चिड़ियाघर ले जाया गया। जब हम लोग गए थे तब तो धूप निकली हुई थी। अचानक थोड़ी देर बाद बदली छा गई और बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। हम लोग फिर भी रुके नहीं और चिड़ियाघर में आगे की ओर बढ़ते रहे। जैसे ही हम लोग मोर के बाड़े (जिसमें मोर रहता है) में पहुंचे तो मोर इधर-उधर टहलते हुए दिखाई दिए। मौसम और खराब हुआ और आकाश में चारों तरफ बादल घिर आए। तेज बारिश भी शुरू हो गई। तभी जालीघर में बंद मोरों ने अपने पंख फैलाए और नृत्य करने लगे। मोरों को ऐसा देख बहुत अच्छा लगा। मोर खुशी से नाच रहे थे। उन्हें इस तरह देख मन को शांति मिली। यह दृश्य सही में मोहक था।


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नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को सांप से किस तरह बचाया? इस घटना के आधार पर नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

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यह पाठ एक ‘रेखाचित्र’ है। रेखाचित्र की क्या-क्या विशेषताएँ हैं? जानकारी प्राप्त कीजिए और लेखिका के लिखे किसी अन्य रेखाचित्र को पढि़ए।

3

पुस्तकालय से ऐसी कहानियों, कविताओं या गीतों को खोजकर पढि़ए जो वर्षा ऋतू और मोर के नाचने से संबंधित हों।

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निबंध में आपने ये पंक्तियाँ पढी हैं- ‘मैं अपने शाल में लपेटकर उसे संगम ले गई। जब गंगा की बीच धार में उसे प्रवाहित किया गया तब उसके पंखों की चंद्रिकाओं से बिंबित-प्रतिबिंबित होकर गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर के समान तरंगित हो उठा।’- इन पंक्तियों में एक भावचित्र है। इसके आधार पर कल्पना कीजिए और लिखिए कि मोरपंख की चंद्रिका और गंगा की लहरों में क्या-क्या समानताएं लेखिका ने देखी होंगी जिसके कारण गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयू पंख के समान तरंगित हो उठा।