पुस्तकालय से ऐसी कहानियों, कविताओं या गीतों को खोजकर पढि़ए जो वर्षा ऋतू और मोर के नाचने से संबंधित हों।
कहानी- मैं और जंगल
मेरा हमेशा से सपना था कि मैं जंगल की सैर पर दोस्तों के साथ जाऊं। एक बार मौका भी मिला। ऑफिस की तरफ से जिम कॉर्बेट पार्क गए। दोस्तों के साथ बस का लंबा सफर मानों आंख झपकते ही खत्म हो गया। बस में दोस्तों के साथ गाना गाते, डांस करते और जिम कॉर्बेट पहुंचने की उत्सुकता बहुत थी। देर रात करीब 11 बजे के आसपास हम लोग वहां पहुंचे। ऑफिस की तरफ से पूरी ट्रिप थी तो सारा इंतजाम भी उन्हीं का था। सबको कमरे दिए गए और डिनर करके सो गए। सोते-सोते रात के 1 बज गए। सुबह जल्दी आंख खुल गई और हम लोग जिम कॉर्बेट जाने के लिए तैयार हो गए। जिम कॉर्बेट पार्क के अंदर जाने के लिए जीप की। मौसम बड़ा ही सुहावना था क्योंकि वर्षा ऋतु थी। हालांकि इस मौसम में पहाड़ी इलाकों पर जाना खतरों से कम नहीं होता। हम लोगों ने जीप से जिम कॉर्बेट पार्क के अंदर धीरे-धीरे जाना शुरू किया। शुरुआत में तो कोई जानवर हम लोगों को नजर नहीं आया। जैसे-जैसे अंदर गए कुछ भी दिखाई न देने पर मनोबल माननों टूटता गया। तभी मेरे एक दोस्त ने कहा देखो मोर है वहां। सब ने कहां शांत रहना वरना वो डर जाएंगे। हम लोग बिल्कुल शांत रहे। जैसे ही थोड़ा पास पहुंचे तो वहां एक मोर नहीं बल्कि मोरों का झुंड था। वह धीरे-धीरे अपने पंख फैला रहे थे। तभी बारिश होने लगी और उन्होंने अपने पूरे पंख फैला लिए, इसके साथ ही नृत्य करना शुरू कर दिया। एक साथ इतने सारे मोरों को ऐसा देख बहुत अच्छा लगा। यह दृश्य आज भी मेरे मन में सुनहरे याद बनकर कैद है।
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