सोचो और बताओ
तुम भी अपने संसार के बारे में कल्पनाएँ ज़रूर करते होंगे। अपने सपनों की दुनिया के बारे में बताओ।
हाँ मैं भी अपने सपनों की दुनिया की कल्पना करता हूं, लेकिन मेरी सपनों की दुनिया बहुत अलग है। मैं एक ऐसे संसार की कल्पना करता हूं जहां हर इंसान को बराबर का दर्जा दिया जाए। एक ऐसा संसार जहां कोई अमीर गरीब न हो। जहां कोई भूखा न रहे। हर तरफ पेड़ पौधे हो। उस दुनिया में प्रदुषण का नामों निशान न हो। बड़ी बड़ी इमारतों की जगह कच्चे घर हो। मोटर साइकिल, गाड़ियों की जगह साइकल की सवारी हो। सभी लोग मिल जुलकर प्यार से एक साथ रहते हो।
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