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कविता का हर बंध वह चिड़िया जो से शुरू होता है और मुझे बहुत प्यार है पर खत्म होचा है। तुम भी इन पंक्तियों का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से कविता में कुछ नए बंध जोड़ो।

वह चिड़िया जो

चूं चूं करती मेरी आंगन में आती है


दाने चुगकर अपने घर को रोजाना लौट जाती है


मेहनत करके बच्चों का पेट पालती है


उस चिड़िया से मुझे प्यार है


वह चिड़िया जो


तिनका तिनका इकट्ठा करती


रोजाना घर की नींव रखती


सबके मन को भाता है उसका ये काम


उस चिड़िया पर मुझे बहुत प्यार है


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1

कवि ने नीलीचिड़िया का नाम नहीं बताया है। वह कौन-सी चिड़िया रही होगी? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए पक्षी-विज्ञानी सालिम अली की पुस्तक भारतीय पक्षी देखो। इनमें ऐसे पक्षी भी शामिल हैं जो जाड़े में एशिया के उत्तरी भाग और अन्य ठंडे देशों से भारत आते हैं। उनकी पुस्तकों देखकर तुम अनुमान लगा सकते हो कि इस कविता में वर्णित नीली चिड़िया शायद इनमें से कोई एक रही होगी-

नीलकंठ, छोटा किलकिला, बड़ा पतरिंगा, कबूतर


2

नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। उनमें से अगर कोई पक्षी एक से अधिक रंग का है तो लिखो कि उसके किस हिस्से का रंग कैसा है। जैसे तोते की चोंच का रंग लाल और शहीर हरा है।

4

तुम भी ऐसी कल्पना का सकते हो कि वह फूल का पैधा जो-पीली पंखुड़ियों वाला-महक रहा है-मैं हूँ।उसकी विशेषताएं मुझमें हैं......। फूल के बदले वह कोई दूसरी चीज भी हो सकती है जिसकी विशेषताओं को गिनाते हुए तुम उसी चीज से अपनी समानता बता सकते हो....ऐसी कल्पना के आधार पर कुछ पंक्तियां लिखो।

1

पंखों वाली चिड़िया

उपर वाली दराज


नीले पंखों वाली चिड़िया


सबसे ऊपर वाली दराज


यहाँ रेखांकित शब्द विशेषण का काम कर रहे हैं। ये शब्द चिड़िया और दराज संज्ञाओं की विशेषता बता रहे हैं, अतः रेखांकित शब्द विशेषण हैं और चिड़िया, दराज विशेष्य हैं। यहाँ वाला/वाली जोड़कर बनने वाले कुछ और विशेषण दिए गए हैं। ऊपर दिए गए उदाहरणों की तरह इनके आगे एक-एक विशेषण और जोड़ो।


………………………मोरोंवाला बाग़


………………………..पेड़ोंवाला घर


……………………….फूलोंवाली क्यारी


……………………….स्कूलवाला रास्ता


……………………….हंसनेवाला बच्चा


……………………...मूंछोंवाला आदमी