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अक्षर ध्वनियों (स्वरों और व्यजनों) के प्रतीक होते हैं। उदाहरण के लिए ‘हिंदी’, ‘उर्दू’ और ‘बांग्ला’ आदि शब्दों में प्रत्येक अक्षर के लिए उसकी ध्वनि निर्धारित है। कुछ चित्रों से भी संकेत व्यक्त होते हैं। नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उनसे क्या संकेत व्यक्त होते हैं, बताओ।


आगे स्कूल होने तथा धीरे चलें का संकेत है।

गोल चक्कर का संकेत है।


दायें मुड़ने का संकेत है।


बायें मुड़ने का संकेत है।


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2

वैसे तो संख्याएँ संज्ञा होती हैं पर कभी-कभी ये विशेषण का काम भी करती हैं, जैसे नीचे लिखे वाक्य में -

हमारी धरती लगभग पाँच अरब साल पुरानी है।


कोई दस हजार साल पहले आदमी ने गाँवों को बसाना शुरू किया।


इन वाक्यों में रेखांकित अंश ‘साल’ संज्ञा के बारे में विशेष जानकारी दे रहे हैं, इसलिए ये संख्यावाचक विशेषण हैं। संख्यावाचक विशेषण का इस्तेमाल उन्हीं चीजों के लिए होता है जिन्हें गिना जा सके, जैसे- चार संतरे, पाँच बच्चे, तीन शहर आदि। पर यदि किसी चीज को गिना नहीं जा सकता तो उसके साथ संख्या वाले शब्दों के अलावा माप-तोल आदि के शब्दों का इस्तेमाल भी किया जाता है-


तीन जग पानी


एक किलो चीनी


यहाँ रेखांकित हिस्से परिणामवाचक विशेषण हैं क्योंकि इनका संबंध माप-तोल से है। अब नीचे लिखे हुए को पढ़ो। खाली स्थानों में बॉक्स में दिए गए माप-ताल के उचित शब्द छाँटकर लिखो।



तीन------------------- खीर दो ------------------- जमीन


छह -------------------- कपड़ा एक --------------------- रेत


दो -------------------- कॉप़फ़ी पाँच --------------------- बाजरा


एक -------------------- दूध तीन ---------------------- तेल


1

अपनी लिपि के कुछ अक्षरों के बारे में जानकारी इकट्ठी करो-

(क) जो अब प्रयोग में नहीं रहे।


(ख) प्रचलित नए अक्षर जो अब प्रयोग में आ गए हैं।


2

लिखित और मौखिक भाषा के हानि-लाभ के बारे में दोस्तों के बीच चर्चा करो।

4

अपने आसपास के किसी मूक-बधिर बच्चों के स्कूल में जाकर कुछ समय बिताओ और अपने अनुभव लिखो।