सई पंराजपे द्वारा निर्देशित फीचर फिल्म ‘स्पर्श’।
‘स्पर्श’ फिल्म सल 1980 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह मुख्य किरदार में थे। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे दृष्टिहीन बच्चे अपना जीवन जीते हैं उनका स्कूल में जीवन कैसे बीतता है। स्कूल में वह किस तरह महसूस करते हैं। यही इस फिल्म की कहानी है। इस फिल्म की कहानी एक नवजीवन विद्यालय से शुरू होती है जिसके प्राचार्य नसीरुद्दीन शाह होते हैं। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह का नाम अनिरुद्ध परमार है। एक दिन चिकित्सक के पास जाते वक्त नसीरुद्दीन शाह को गाना सुनाई देता है। इस गाने को सुनकर वह मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वह गाना कोई और नहीं बल्कि शबाना आजमी (कविता आजमी) गा रही होती हैं। कुछ वक्त पहले ही कविता के पति की मौत हुई होती है। कविता की एक खास दोस्त होती है जिसका नाम मंजु होता है। मंजु के द्वारा ही कविता की मुलाकात अनिरुद्ध से होती है। अनिरुद्ध कविता की आवाज पहचान जाता है। वह कविता से कहता है कि उसके स्कूल में संगीत टीचर की जरूर है। पहले तो कविता मना कर देती है लेकिन बाद में मान जाती है। धीरे-धीरे कविता और अनिरुद्ध की दोस्ती अच्छी हो जाती है।
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