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माँ अपना एक दिन कैसे गुजारती है? कुछ मौकों पर उसकी दिनचर्या बदल जाया करती हैं- जैसे- मेहमानों के आ जाने पर, घर के किसी के बीमार पड़ जाने पर या त्योहार के दिन। इन अवसरों पर माँ की दिनचर्या पर क्या फर्क पड़ता है? सोचो और लिखो।

मेहमानों के घर आ जाने पर या फिर परिवार में किसी की तबीयत खराब हो जाने पर मां पर काम का बोझ ज्यादा बढ़ जाता है। वह दिनभर काम में इतनी बिजी रहती हैं कि उन्हें बिल्कुल भी आराम करने का वक्त नहीं मिलता। मेहमानों को लिए नाश्ता, दिन में आए हैं तो लंच या फिर रात में आए हैं तो डिनर कराकर ही मां मेहमानों को जाने देती हैं। इस वजह से खाने की तैयारी करना, एक सूखी सब्जी, एक रसे की सब्जी, रोटी, पुलाव, सलाद, रायता आदि बनाना। मेहमानों को जाने पर घर समेटना। वहीं अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो पहले तो शख्स का ध्यान रखना। घर में उस वक्त दो खाने की वैराइटी बनती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मरीज को गरिष्ठ खाना नहीं दे सकते। इसलिए डॉक्टर के बताए अनुसार मरीज के लिए खाना बनाना उसके बाद परिवार के बाकी सदस्यों के लिए खाना बनाना। इस तरह से इन दोनों परिस्थितियों में मां पर काम का बोझ बहुत पड़ जाता है।


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