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नौकरों को हमें वेतनभोगी मजदूर नहीं, अपने भाई के समान मानना चाहिए। इसमें कुछ कठिनाई हो सकती है, फिर भी हमारी कोशिश सर्वथा निष्फल नहीं जाएगी। गाँधी जी ऐसा क्यों कहते होंगे? तर्क के साथ समझाओ।

गांधी जी नौकरों को भी अपने जैसा ही समझते थे। उन्हें लगता था कि जैसे कि हम लोग इंसान है। जिस तरह से हमें मान सम्मान चाहिए ठीक उस तरह नौकरों को भी सम्मान मिलना चाहिए। उन्हें भी प्रेम और सहानुभूति मिलनी चाहिए। इस तरह का व्यवहार उन्हें खुशी दे सकता है।


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2

अपने घर के किन्हीं दस कामों की सूची बनाकर लिखो और यह भी कि उन कामों को घर के कौन-कौन से सदस्य अकसर करते हैं? तुम तालिका की सहायता ले सकते हो-

अब देखो कि कौन सबसे ज्यादा काम करता है और कौन सबसे कम। कामों का बराबर बँटवारा हो सके, इसके लिए तुम क्या कर सकते हो? सोचकर कक्षा में बताओ।


1

गाँधी जी अपने साथियों की जरूरत के मुताबिक हर काम कर देते थे, जेकिन उनका खुद का काम कोई और करे, ये उन्हें पसंद नहीं था। क्यों? सोचो और अपनी कक्षा में सुनाओ।

3

गाँधी जी की कही-लिखी बातें लगभग सौ से अधिक किताबें में दर्ज है। घर के काम, बीमारों की सेवा, आगंतुकों से बातचीत आदि ढेरों काम करने के बाद गाँधी जी को लिखने का समय कब मिलता होगा? गाँधी जी का एक दिन कैसे गुजरता होगा, इस पर अपनी कल्पना से लिखो।

4

पाठ में बताया गया है कि गाँधी जी और उनके साथी आश्रम में रहते थे। घर और स्कूल के छात्रवास से गाँधीजी का आश्रम किस तरह अलग था? कुछ वाक्यों में लिखो।