गरमी के दिनों में कच्ची सड़क की तपती धूल में नंगे पँव चलने पर पाँव जलते हैं। ऐसी स्थिति में पेड़ की छाया में खड़ा होने और पाँव धो लेने पर बड़ी राहत मिलती है। ठीक वैसे ही जैसे प्यास लगने पर पानी मिल जाए और भूख लगने पर भोजन। तुम्हें भी किसी वस्तु की आवश्यकता हुई होगी और वह कुछ समय बाद पूरी हो गई होगी। तुम सोचकर लिखो कि आवश्यकता पूरी होने के पहले तक तुम्हारे मन की दशा कैसी थी?
जरूरत के मौके पर जब वह चीज नहीं मिलती है तो मन में व्याकुलता होना स्वाभाविक है। जब तक वह चीज नहीं मिलती मन न चाहते हुए भी उसी तरफ लगा रहता है। बस ऐसा लगता है कि किसी भी तरह से वह आवश्यकता पूरी हो जाए और मन को तसल्ली मिल जाए।
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