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लखि = देखकर धरि = देखकर

पोंछि = पोंछकर जानि = जानकार


ऊपर लिखे शब्दों और उनके अर्थों को ध्यान से देखो। हिंदी में जिस उद्देश्य के लिए हम क्रिया में कर जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि () को जोड़ा जाता है, जैसे- अवधी में बैठ + ि = बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर। तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के ऐसे छह शब्द लिखो। उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में सुनाओ


मेरी भाषा हिंदी खड़ी बोली है, पर भोजपुरी में निम्नलिखित उद्देश्य के लिए अलग क्रिया के साथ के का प्रयोग करते हैं- जैसे-



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4

दोनों सवैयों के प्रसंगों में अंतर स्पष्ट करो।

5

पाठ के आधार पर वन के मार्ग का वर्णन अपने शब्दों में करो।

1

गरमी के दिनों में कच्ची सड़क की तपती धूल में नंगे पँव चलने पर पाँव जलते हैं। ऐसी स्थिति में पेड़ की छाया में खड़ा होने और पाँव धो लेने पर बड़ी राहत मिलती है। ठीक वैसे ही जैसे प्यास लगने पर पानी मिल जाए और भूख लगने पर भोजन। तुम्हें भी किसी वस्तु की आवश्यकता हुई होगी और वह कुछ समय बाद पूरी हो गई होगी। तुम सोचकर लिखो कि आवश्यकता पूरी होने के पहले तक तुम्हारे मन की दशा कैसी थी?

2

“मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उसमें एक बीज।’’

उसमें एक बीज डूबा है।


जब हम किसी बात को कविता में कहते हैं तो वाक्य के शब्दों के क्रम में बदलाव आता है, जैसे-“छांह घरीक ह्वै ठाढ़े” को गद्य में ऐसे लिखा जा सकता है “छाया में एक घड़ी खड़े होकर”। उदाहरण के आधार पर नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को गद्य के शब्दक्रम में लिखो।


- पुर तें निकसी रघुबीर-बधू,


- पुट सूखि गए मधुराधर वै।।


- बैठि बिलंब लौं कंटक काढ़े।


- पर्नकुटी करिहौं कित ह्वै?