पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?
पाठ में आया प्रत्येक प्रसंग प्रायः हृदयस्पर्शी हैं। सभी प्रसंग हमें हमारे बचपन की याद दिलाते हैं| उदाहरण के लिए-
(क) माँ का अचानक भोलानाथ को पकड़कर तेल लगाना, उसका छटपटाना, फिर भी उसे कन्हैया बनाकर छोड़ना तथा बाबू जी के साथ आकर रोना-सिसकना भूलकर अपने साथियों के खेल में शामिल हो जाना।
(ख) भोलानाथ का अपने पिता के साथ बहुत करीबी या कहें कि एक दोस्त की तरह संबंध है| किस प्रकार से उसके पिता उसके खेल कूद में सहभागी बनते हैं|
(ग) भोलानाथ और उसके साथियों का खेती करने का अभिनय करना, खेती की पैदावार (राशि) को तौलना, इसी बीच बाबू जी का आना और सारी राशि को छोड़कर बच्चों का हँसते हुए भाग जाना, बटोहियों को देखते रह जाने का प्रसंग दिल को छू जाता है।
(घ) भोलानाथ और उसके साथियों का टीले पर चूहे का बिल देख पानी उलीचना, बिल से चूहे की जगह साँप निकलना, फिर तो बच्चों का डरना, इधर-उधर काँटों में भागना, भोलानाथ का माँ के अँचल में छिपना, सिसकना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना, बाबू जी के लेने पर भी माँ की गोद न छोड़ना मर्मस्पर्शी दृश्य उपस्थित करता है।
(च) पाठ का सबसे महत्वपूर्ण, रोचक एवं केन्द्रीय प्रसंग वह है जब शर्प बच्चों के पीछे पड़ जाता है और बच्चे उसके डर से भागते हैं| भोलानाथ भागते हुए सीधे अपनी माँ की गोद में छुप जाता है| पिता के काफी प्रयास के पश्चात भी वह उनके पास जाने के लिए तैयार नहीं होता| इसी केन्द्रीय भाव के आधार पर इस रचना का नाम माता का आँचल रखा गया है जोकि इसका केन्द्रीय भाव है|
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