माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
भोलानाथ का अधिकांश समय पिता के साथ बीतता है। क्योंकि वह उनके साथ अकसर खेल कूंद करने, घुमने चला जाता था| उसका अपने पिता से बहुत गहरा और एक मित्र की तरह स्नेहपूर्ण संबंध था| है कहें तो पिता और भोलनानाथ का संबंध व्यक्ति और छाया का है। भोलानाथ का माँ के साथ संबंध दूध पीने तक का रह गया है। अंत में साँप से डरा हुआ बालक जब मदद की आस में घर की तरफ भागता है तो पिता के पहले मिलने के पश्चात भी माँ के पास जाता है और अद्भुत रक्षा और शांति का अनुभव करता है। यहाँ भोलानाथ पिता को अनेदखा कर देता है जबकि वह अधिकांश समय पिता के सानिध्य में रहता है। इस आधार पर ‘माता का अँचल’ सटीक शीर्षक है।
अन्य और भी उचित तथा उपयुक्त शीर्षक हो सकते हैं_ जैसे-
(क) माता-पिता और मेरा बचपन|
(ख) मनोहारी बचपन|
(ग) बचपन की स्मृतियाँ|
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.