धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत
कर देती थीं? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।
धान की रोपाई के समय भगत के स्वरों की गूँज से आसपास के लोगों के हृदय मचल उठते थे। आषाढ़ मास की रिमझिम वर्षा, आकाश में बादल, ठंडी पुरवाई हवा इस सब के बीच भगत की आवाज में, कानों को झंकृत कर देने वाली स्वर-लहरियाँ सुनाई देती थीं। भगत की आवाज कान में पड़ते ही पानी में खेलते हुए बच्चे झूम उठते थे। खेत की मेड़ पर कलेवा लिए बैठी हुई औरतों के होंठ स्वयं ही स्वाभाविक रूप से कंपन करने लगते। खेतों में हल चलाते कृषकों के पैर एक ताल से उठने लगते। खेतों में रोपनी करने वालों की उँगलियाँ स्वतः ही एक विशेष क्रम में चलने लगतीं थी।
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