अपनी दादी, नानी और माँ से बातचीत कीजिए और (स्त्री-शिक्षा संबंधी) उस समय की स्थितियों का पता लगाइए और अपनी स्थितियों से तुलना करते हुए निबंध लिखिए। चाहें तो उसके साथ तसवीरें भी चिपकाइए।
मैंने अपनी नानी से सुन रखा था कि उन्होंने मात्र पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी। जब हमें वह पढ़ते देखतीं तब उन्हें हमेशा अफसोस होता था कि वे मात्र इतना ही क्यों पढ़ पायीं। इसका कारण वे उस जमाने में स्त्री शिक्षा के प्रति परिवार और समाज के नकारात्मक रवैये को बताती थीं। वास्तव में तब जमींदारी के जमाने में मेरे नानी के घर में पैसों की कमी नहीं थी क्योंकि इस्टेट की सालाना आय 64000 रूपये थी जो तब के जमाने में काफी बड़ी राशि मानी जाती थी। नानी के आगे नहीं पढ़ पाने के वास्तविक कारणों में उस जमाने के बड़े बुजुर्गों की रूढिवादी सोच का ही नाम लिया जा सकता है। आज मेरे या मेरी एक पीढ़ी आगे के बच्चों के समय रूढिवादी सोच में काफी परिवर्तन आया है। आज आर्थिक रूप से सबल लोगों की क्या कहें कम संपन्न लोग भी अपने बच्चों विशेषकर बच्चियों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। निर्धन लोग अपना पेट काट कर भी यानि स्वयं भूखा रहकर भी अपने बच्चों की शिक्षा में कोई कमी नहीं रखना चाहते हैं। आज समय बिल्कुल बदल गया है। लोग शिक्षा के महत्व को समझने लगे हैं। वे समझने लगे हैं कि अच्छी शिक्षा प्राप्त कर ही हम अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए यथोचित उपाय कर सकते हैं। शिक्षित होने पर कोई हमारा शोषण नहीं कर सकता है। हमारी आंखें हमेशा खुली रहेंगी। अच्छी शिक्षा प्राप्त होने पर कोई हमारी आंख बंद होने पर भी हमारी पोटली गायब नहीं कर पायेगा। ऐसा इसिलिए होता है क्योंकि शिक्षित होने पर हमारी अक्ल की आंखें हमेशा खुली रहती हैं।
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