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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही_


वशीकृता सदैव है बनी हुर्ह स्वयं मही।


विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,


विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?

कवि कहता है कि जिस मनुष्य के हृदय में दूसरे प्राणियों के लिए सहानुभूति का भाव है वह धनी है। दूसरों के प्रति सहानुभूति ही सबसे बड़ी पूंजी है। जो मनुष्य दूसरों के प्रति सहानुभूति रखता है वह सभी को वश में कर सकता है। यह संपूर्ण पृथ्वी अपने आप उसके वश में हो जाती है। कभी महात्मा बुद्ध की करुणापूर्ण व्यवहार के विषय में कहता है कि उन्होंने प्राणी के प्रति करुणा का भाव होने के कारण ही तत्कालीन पारंपरिक मान्यताओं का विरोध किया था। उनके इस कार्य से सारा संसार उनके सामने विनम्र हो कर झुक गया। कभी पुनः कहता है कि जो मनुष्य दूसरों का भला करता है वही उदार हृदय वाला, है सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर देता है।


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