निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है यदि हाँ, तो कैसे?
कवि की प्रस्तुत प्रार्थना मुझे अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है। सबसे पहले तो मैं इस प्रार्थना को अतुकान्त रूप या बिना किसी प्रत्यक्ष लय में आबद्ध पाता हूं। यह लय हम अस्पष्ट रुप में कुछ-कुछ पंक्तियों के अंतराल के बाद पाते हैं जो स्पष्ट नहीं है। कविता लेखन कला की दृष्टि से यह रचना कठिन जान पड़ती है। इसके अलावा इस कविता में हिन्दी के कुछ तत्सम या कठिन शब्दों का प्रयोग किया गया है। हम सामान्यतः देखते हैं कि अन्य प्रार्थनाओं में अकसर सुख, समृद्धि, दुखों एवं समस्याओं से निवारण संबंधित प्रार्थना होती है जबकि यह प्रार्थना उनसे बिलकुल ही अलग है| इस प्रार्थना में कवि ने सुख समृद्धि आदि की बात किसी भी स्थान पर नहीं की| वह तो इसमें अपने लिए आत्मविश्वास की माँग करता है और स्वयं समस्याओं से लड़ना चाहता है जबकि अधिकतर प्रार्थना कविताओं में ऐसा नहीं होता| इसीलिये यह प्रार्थना गीत अन्य प्रार्थनाओं से अलग है|
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