पी.टी. साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए|
पीटी साहब को अनुशासन में रहना और अन्यों को अनुशासन में रखना बहुत पसंद था। बच्चों की छोटी सी गलती भी उन्हें सहन ना थी। प्रार्थना सभा के समय जहां सभी मास्टर लड़कों की तरह ही कतार बांधकर उनके पीछे खड़े होते वहीं पीटी साहब लड़कों की कतार के पीछे खड़े ये यह देखते रहते कि कौन सा लड़का कतार में ठीक नहीं खड़ा है। उनके डर की वजह से सभी लड़के कतार में सीधे खड़े रहने का प्रयत्न करते। अगर कोई लड़का अपना सिर भी इधर उधर हिला लेता या पांव से दूसरी पिंडली तक खुजलाने लगता तो वे उसकी ओर बाघ की तरह झपट पड़ते। लेकिन स्काउंटिंग का अभ्यास करवाते समय जब बच्चे एक भी गलती ना करते तो पीटी साहब उनकी तारीफ करने से भी पीछे ना रहते। इसलिए जब कभी भी वे बच्चों को शाबाशी देते तो बच्चों को यह किसी फोजी तमगों से कम नहीं लगती थी।
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