लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है?
लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती इसलिए कहा है क्योंकि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता खत्म होती जा रही है। पहले के लोग सादा जीवन—उच्च विचार का पलन करते थे। वे सामाजिकता तथा नैतिकता के पक्षधर थे। आज उपभोक्तावादी संस्कृति भारतीय संस्कृति की नींव हिला रही है। समाज में दिखावा बढ़ रहा है। विकास के उद्देश्यों को पीछे छोड़ झूठे लक्ष्यों का पीछा किया जा रहा है। स्वार्थ हावी हो रहा है। उपभोक्तावादी संस्कृति के बारे में गांधी जी ने कहा था कि अपनी बुनियाद पर कायम रहें। उपभोक्ता संस्कृति हमारी नींव हिला रही है और ये दुनिया, वर्तमान समाज और मानव के अस्तित्व पर एक बड़ा खतरा है|
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