इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइए।
लेखक ने पाठ की शुरुआत किसी पहेली की तरह की है। एक बार में पढ़ने पर लेखक की भाषा समझना मुश्किल है। धीरे—धीरे समझ में आएगा कि लेखक क्या कहना चाह रहा है। हालांकि बाद में अपने शब्दों से लेखक ने हर बात को स्पष्ट कर दिया है। लेखक की भाषा-शैली संबंधी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. मिश्रित शब्दों का प्रयोग- लेखक ने पाठ में उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के कुछ शब्दों के साथ हिंदी का अच्छा प्रयोग किया है। साथ ही तत्सम—तत्भव शब्दों के इस्तेमाल की अधिकता नजर आई।
2. मुहावरों का प्रयोग- लेखक ने पाठ में मुहावरों का प्रयोग भी किया है। ऐसा शायद इसलिए कि पाठ में रोचकता आ जाए।
3. जटिल और लंबे वाक्यों का प्रयोग- लेखक ने इस पाठ की शुरुआत लंबे वाक्यों से की है। ज्यादा लंबे वाक्य होने के कारण समझना थोड़ा मुश्किल है।
4. भावानुकूल भाषा- लेखक ने कई जगहों पर भाव को व्यक्त करने वाली भाषा भी लिखी है। इससे पाठक लेखक के भाव आसानी से समझ सकता है।
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