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लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।

लेखिका ने क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज में पाँचवीं में प्रवेश लिया। यहाँ देश के विभिन्न भागों से छात्राएँ पढ़ने आती थीं। लेखिका “महादेवी वर्मा” के छात्रावास का परिवेश बहुभाषी था। कोई हिंदी बोलता था तो किसी की भाषा उर्दू थी। इस छात्रावास में देश के विभिन्न क्षेत्रों की छात्राएं थीं और हम जानते हैं कि हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न भाषाओं के अलावा विभिन्न बोलियाँ भी बोली जाती हैं| इसी कारण वहाँ कुछ मराठी लड़किया भी थीं, जो आपस में मराठी बोलती थीं, बुंदेलखंड से आयी लड़कियाँ बुन्देलखंडी बोलती थी, बिहार से आयी लड़कियाँ भोजपुरी बोलती थीं, अवध की लड़कियाँ आपस में अवधी बोलती थीं। सभी अपनी-अपनी बोली में बात करते हुए साथ-साथ हिंदी अथवा उर्दू में अपनी पढ़ाई करती थीं। उनमें किसी तरह का कोई विवाद न था। छात्रावास में उन्हें हिंदी तथा उर्दू दोनों की शिक्षा दी जाती थी।


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ज़ेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। ज़ेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?

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महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?

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महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।

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महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का ज़िक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।