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आशय स्पष्ट कीजिए।

इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करुण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव-सत्य को देखा है, जो मनुष्य, मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पाता।

गुरुदेव जब अपने कुत्ते की पीठ पर हाथ फेरते हैं तो कुत्ते का रोम-रोम स्नेह का अनुभव करता है। तब ऐसा लगता है मानों उसके अतृप्त मन को उस स्पर्श से तृप्ति मिल गई हो। भले कुत्ते के पास इसे बताने के लिए वाणी नहीं है लेकिन कवि की दृष्टि उसके मर्म को समझ जाती है। साधारण मनुष्य इस भावना का अनुभव नहीं कर पाते हैं। ऐसे में कवि ने एक मूक पशु की भावनाओं का अनुभव कर लिया।


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गुरुदेव द्वारा मैना को लक्ष्य करके लिखी कविता के मर्म को लेखक कब समझ पाया?

4

प्रस्तुत पाठ एक निबंध है। निबंध गद्य-साहित्य की उत्कृष्ट विधा है, जिसमें लेखक अपने भावों और विचारों को कलात्मक और लालित्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त करता है। इस निबंध में उपर्युक्त विशेषताएँ कहाँ झलकती हैं? किन्हीं चार का उल्लेख कीजिए।

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पशु-पक्षियों से प्रेम इस पाठ की मूल संवेदना है। अपने अनुभव के आधार पर ऐसे किसी प्रसंग से जुड़ी रोचक घटना को कलात्मक शैली में लिखिए।

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गुरुदेव जरा मुस्करा दिए।

मैं जब यह कविता पढ़ता हूं।


ऊपर दिए गए वाक्यों में एक वाक्य में अकर्मक क्रिया है और दूसरे में सकर्मक। इस पाठ को ध्यान से पढ़कर सकर्मक और अकर्मक क्रिया वाले चार-चार वाक्य छांटिए।