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पशु-पक्षियों से प्रेम इस पाठ की मूल संवेदना है। अपने अनुभव के आधार पर ऐसे किसी प्रसंग से जुड़ी रोचक घटना को कलात्मक शैली में लिखिए।

मेरे भाई ने कुत्ता पाल रखा था जिसका नाम ब्रूनो था। वह ब्रूनो को बहुत प्यार करते थे। उसे अपने हाथ से खाना खिलाना, उसके साथ खेलना यहां तक कि कभी-कभी उसे अपने साथ बिस्तर पर तक सुला लिया करते थे। उन्होंने उसे हर वो गतिविधियां सिखाई जो एक इंसान अपने बच्चे को सिखाता है। जैसे लोगों से हैलो करना, बाय करना आदि। एक दिन भईया को कुछ दिनों के लिए काम की वजह से शहर जाना पड़ा। उस दिन ब्रूनो ने कुछ ना खाया और कुछ दिन बाद जब वो लौटे तो करीब 500 मीटर दूर से ही ब्रूनो को पता लग गया कि भईया आ गया है। वह दरवाजे पर खड़े रहा और आते ही उन्हें चाटने लगा। इस घटना के बाद से जब कभी भी भाई को बाहर जाना होता तो ब्रूनो को साथ लेकर जाया करते।


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प्रस्तुत पाठ एक निबंध है। निबंध गद्य-साहित्य की उत्कृष्ट विधा है, जिसमें लेखक अपने भावों और विचारों को कलात्मक और लालित्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त करता है। इस निबंध में उपर्युक्त विशेषताएँ कहाँ झलकती हैं? किन्हीं चार का उल्लेख कीजिए।

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आशय स्पष्ट कीजिए।

इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करुण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव-सत्य को देखा है, जो मनुष्य, मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पाता।

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गुरुदेव जरा मुस्करा दिए।

मैं जब यह कविता पढ़ता हूं।


ऊपर दिए गए वाक्यों में एक वाक्य में अकर्मक क्रिया है और दूसरे में सकर्मक। इस पाठ को ध्यान से पढ़कर सकर्मक और अकर्मक क्रिया वाले चार-चार वाक्य छांटिए।

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निम्नलिखित वाक्यों में कर्म के आधार पर क्रिया-भेद बताइए।

(क) मीना कहानी सुनाती है। (ख) अभिनव सो रहा है।


(ग) गाय घास खाती है। (घ) मोहन ने भाई को गेंद दी।


(घ) लड़कियाँ रोने लगीं।