कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है?
कवि ने कविता में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया है, जैसे-
(क) यह हरा ठिगना चना, बाँधे मुरैठा शीश पर
छोटे गुलाबी फूल का, सज कर खड़ा है।
अर्थात यहाँ छोटे कद का हरे चने का पौधा जो गुलाबी रंग की पगड़ी बाँधे खड़ा है| यहाँ चने के पौधे की तुलना मनुष्य से की गयी है|
(ख) पास ही मिल कर उगी है, बीच में अलसी हठीली।
देह की पतली, कमर की है लचीली,
नील फूले फूल को सिर पर चढ़ाकर
कह रही है, जो छुए यह दूँ हृदय का दान उसको।
अर्थात यहाँ अलसी के पौधे को हठीली तथा सुन्दर स्त्री के रुप में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार यहाँ अलसी के पौधे का मानवीकरण किया गया है।
(ग) हैं कई पत्थर किनारे, पी रहे चुपचाप पानी
अर्थात यहाँ पत्थर जैसी निर्जीव वस्तु का भी मानवीकरण बड़े कलात्मक रूप से किया गया है|
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