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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

सुनि अठिलैहें लोग सब, बाँटि न लैहें कोय।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि हमें बता रहे हैं कि कभी भी अपने दुख के बारे में दूसरों को न बताएं। कोई भी आपके मन की बात को नहीं समझेगा। ऐसा करके आप दूसरों के हाथ में अपनी कमजोरी दे देते हैं। सामने वाला भले ही आपकी बात को सुनेगा, लेकिन वह बाद में इसका मजाक बनाएगा। इसलिए हमेशा अपने मन की परेशानियों को खुद तक ही सीमित रखें।


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