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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

‘गीत-अगीत’ के केंद्रीय भाव को लिखिए।

मनुष्य के भावों को दिखाने का एक सुगम तरीका है गीत अगीत। मन के जो भाव विचारों में रह जाते हैं वे अगीत हैं जबकि मन के जिन भावों को अभिव्यक्ति मिल जाती है वे गीत हैं| गीत में मनुष्य अपने विचारों को स्वरों के माध्यम से अभिव्यक्त कर देता है जबकि जबकि अगीत को मनुष्य मन ही मन में अनुभव करता है| मनुष्य के लिए दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हैं|


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।

1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

सभी कुछ गीत, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।

2

संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिएः

क) अपने पतझर के सपनों का


मैं भी जग को गीत सुनाता


ख) गाता शुक जब किरण बसंती


छूती अंग पर्ण में छनकर


ग) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की


बिधना यों मन में गुनती है

3

निम्नलिखित उदाहरण में वाक्य-विचलन को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचिलित वाक्य-विन्यास लिखिए-

उदाहरणः तट पर एक गुलाब सोचता


एक गुलाब तट पर सोचता है।


क) देते स्वर यदि मुझे विधाता


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ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर


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ग) गूँज रहा शुक का स्वर बन में


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घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की


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ङ) शुकी बैठ अंडे है सेती


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